Thursday, December 20, 2012

मैं होश में रहूँ न रहूँ तुमको इससे क्या ।

मतलब की बात करलो  , है काम का मसला  ,
कुछ  बात  तो  होगी ही  ,  आये  न  बेवजह ।
अब बंद करो रोज का  ,  अपना ये फलसफा
मैं  होश में रहूँ न रहूँ  ,  तुमको  इससे  क्या ।

इस कदर  भी  गैरों  का  ,  ख्याल  न  करो ,
दुनियां यूंही चलती है  , तूम मलाल न करो ।
होगा करम जो छोड़  दो   ,  मेरे हाल पे मुझे ,
क्यूँ  इस कदर  जीते  हैं   ,  ये सवाल ना करो ।

कोई  भी जतन करलो  ,  मुझे कुछ नही कहना ,
मैं दर्दे - गम कैसे भी सहूँ  ,  तुमको इससे क्या ।
 मैं  होश में रहूँ न रहूँ   ,  तुमको  इससे  क्या ।

दुनियां क्या सोंचती है   ,  बताते हो किसलिए ,
सुनना नही जब कुछ भी  ,  सुनते हो किसलिए ।
कुछ  भी  हो  हाल   ,  हमने  बुलाया  नही  तुम्हें ,
कुछ  तो  भरम  रखते ,  तुम आते हो किसलिए ।

जब  तुमने  मुझे   , अपना  समझा  ही  नही  है ,
तो मैं गैर कहूँ  , अपना कहूँ , तुमको इससे क्या ।
मैं  होश  में  रहूँ न  रहूँ   ,  तुमको  इससे  क्या ।


 

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