Sunday, July 16, 2017

'''' सुमन ''''

बड़ा सा दिल रखो अपना खुले गगन की तरह,
रहो बेख़ौफ़ बेपरवाह इस पवन की तरह,

न चुभो तीर बनके दिल में किसी चुभन की तरह,
रहो बिखेरते खुशबू , सदा सुमन की तरह  || 

महंगाई

सूखी रोटी खाना मुश्किल सब्जी दाल है लाना मुश्किल,
सर पे शामत आयी है , बड़ी बुरी महंगाई है। 

महंगाई मुँह फाड़ खड़े , बनेंगे कैसे दही बड़े,
दूध की कीमत बढती जाए , महंगाई सर चढ़ती जाए,
सपना हुयी मलाई है , बड़ी बुरी महंगाई है। 

जेब है खाली कैश नहीं , चूल्हा है पर गैस नहीं,
पानी से न भूख दबा , आखिर किसपर चढ़े तबा,
पेट में आग लगाई है , बड़ी बुरी महंगाई है। 

अधनंगे, अधपेटे हैं , पेट पकरकर लेते हैं,
महंगाई अब हंसती है, अपने बंधन कसती है,
आपने पर फैलाई है , बड़ी बुरी महंगाई है। 

ठगे - ठगे से लोग खड़े , नेता मिलकर पेट भरे,
आपने हिस्से बाँट रहे , सुख सुविधा सब चाट रहे,
दुनिया देती दुहाई है , बड़ी बुरी महंगाई है। 

दर्दें दिल की दवा रखना

जख्मों के पार अगर जाना हो ,  
अपने जख्मों को हरा रखना।
गर ख्वाहिश  हो आसमां की तो , 
उम्मींदो का बाग़ भरा रखना।.

ज़िन्दगी की उमस भरी दोपहरी में ,
कुछ खुशनुमा आवोहवा रखना।
दर्द और बढ़ाएंगे ये दुनियावालें  ,
पास में दर्दें दिल की दवा रखना।

जहर घोलतें हैं लोग मीठी बातों से , 
ऐसे लोगों से खुद को जुदा रखना।
हो जुदाई ही मयस्सर कहीं जो उल्फत में , 
यार को मान के दिल में खुदा रखना।

हौंसलो की भी आजमाइश हुआ करती हैं , 
अपने पाओं को धरती में जमा रखना।
पावों के नीचे से छीन ले जमीं दुनिया , 
इससे पहले बचा के कुछ आसमां रखना।

कहीं कुतर न दें वो पंख फरफराए तो , 
अपने अरमानों को दिल में दबा रखना।
छिन न लें कहीं वो खुश होने की वजह , 
अपने आखों में ही सपनों का पता रखना।

मिले न प्यार जमाने का कोई बात नहीं , 
अपना प्यार अपने वास्ते बचा रखना।
न होने पाए कभी विरान ये दिल की दुनिया , 
हर कोने में जला के शमां  रखना।।