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Thursday, May 15, 2014

तुझे दिल में सनम रखता हूँ

मैं जिन्दा हूँ या जीने का भरम रखता हूँ ।
क्या इक मैं ही हूँ जो इतना गम रखता हूँ ।

मुझे तो भूल जाना था तुझे अब तक शायद ,
मैं क्यूँ संभालकर दिल में ये सितम रखता हूँ ।

मेरी दरियादिली है मैंने जो माफ़ी दे दी ,
ये मत सोंचना मैं हौसले कम रखता हूँ ।

बिछा ले जितने भी काँटे तू मेरी राहों में ,
अब फूंक - फूंक कर मैं भी कदम रखता हूँ ।

कैसे कह दूँ मैं दिल लेके तू मेरा कुछ भी नही ,
झूठ कहता नही इतनी तो शरम रखता हूँ ।

तूने ठोकर में भी रखा नही मुझको अपनी ,
और मैं हूँ की तुझे दिल में सनम रखता हूँ ।

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