Google+ Followers

Tuesday, May 13, 2014

इश्क जलाती बहुत है

जिंदगी हौसले आजमाती बहुत है ।
हंसाती है तो फिर रुलाती बहुत है ।


इस इश्क को आग से कम न समझो ,
लिपटती है जिससे जलाती बहुत है । 

No comments:

Post a Comment