Google+ Followers

Thursday, April 18, 2013

दिल कि दास्ताँ

तौबा की कितना दर्द है , दुनियां के दिलों में ।
ये इश्क के मारे हुए , इन्सां के  दिलों में।

लगता है की पल भर को ख़ुशी आई और गई ,
जैसे के चार पल को वो , मेहमां हो दिलों में ।

कैसी बनी दिवार थी , दीवार लग गई ,
कच्ची थी शायद इश्क की, मकां वो दिलों में ।

टुटा जो दिल ,  तब हमें मालूम ये हुआ ,
बसी न जाने कितनी बस्तियां हो दिलों में ।

आहिस्ते किया कीजिये , सभी बातें इश्क की ,
नाजुक है दिल  , ये दिल दास्ताँ हो दिलों में । 

No comments:

Post a Comment