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Friday, May 31, 2013

शायरी

आतिशबाजियां तो हुई नही न ही राख हैं न ही आग है ,,


धूं - धूं के फिर क्या जल रहा मेरा दिल है या की चिराग है ।


2 comments:

  1. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    http://madan-saxena.blogspot.in/
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    http://mmsaxena69.blogspot.in/

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  2. dhanyawad sir..............m samay milte hi aapke blog pr awashy jaungi..

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