Friday, March 8, 2013

शायरी

वफा के बदले आया इतना ही मेरे हिस्से में ,

रह गया जिक्र बनके तू  मेरे हर किस्से में । 

तूफान और मैं

हर बार जब तूफ़ान घर उजाड़ कर  गया ।
मैंने जहाँ बसा लिया पहले से भी नया ।

टूटी मेरी कस्ती मगर ,  टूटा  न हौसला ,
मैं हार जब न मानी तूफां  , हार कर गया ।

जाते हुए कहने लगा , कुछ बात है तुझमे ,
हर बार मेरा वार तू  ,  बेकार कर गया ।

ठोकर लगाई इतनी   ,  तुझे तोड़ न पायें ,
ले जाते - जाते हार मैं  , स्वीकार कर गया ।

मैं बोली , कहा किसने , की दुश्मन हो तुम मेरे ,
ऐ दोस्त तू तो मुझपे कई ,  उपकार कर गया ।

पता बता गया तू मुझको  , मेरे हुनर का ,
उजाड़ने आया था पर , संवार कर  गया । 

कहने लगा तेरी यही ,  'अदा ' पसंद है ,
ले दर पे तेरे दिल भी अपना , हार कर गया ।

तूफ़ान ने  भले ही   ,  बिगाड़ा था बहुत कुछ  ,
लेकिन वो जाते -जाते फिर , बहार कर गया ।  

जीने का मजा

कितना बुरा लगता है जब ,
                   जिद करते हो और लड़ते हो ।
फिर कितना अच्छा लगता है ,
                  जब प्यार से गुडिया कहते हो ।

इक चिढ़ता एक चिढाता है ,
                           इक रूठे दूजा मनाता है ।
है गुड्डा गुडिया खेल सही ,
                     पर दिल को कितना भाता है ।

हर रोज लड़ाई होती है ,
                          तकरार प्यार में चलता है ।
तभी कहते है , जीने का मजा ,
                       दोस्तों के संग ही मिलता है । 

Thursday, March 7, 2013

तुम मुझको अच्छे लगते हो

कभी मैं देखूं कभी तुम देखो ,
मैं मुस्काऊ तुम मुस्काओ ।
मैं कुछ बोलू फिर तुम बोलो ,
फिर मिलना आते जाते हो ।
फिर रोज - रोज मुलाकातें हो ।
मैं तोहफे दूँ तुम तोहफे दो ।
कुछ पल लम्हें यूँ ही बीतें ,
संग -संग हँसते गाते जीते ।
तब जाके राजे दिल खोले ,
एहसास कहें हौले - हौले ।
फिर प्यार भरा आलिंगन हो ,
तब जाके प्रेममय जीवन हो ।
पर इन बातों का वक्त कहाँ ,
तुम भी ये बात समझते हो ।
लो सीधा - सीधा कहती हूँ ,
तुम मुझको अच्छे लगते हो । 

शायरी

ढपोरशंख की डफली लेकर , वादों का दम भरते नेता ।
                      जनता की झोली के धन से , अपनी झोली भरते नेता ।

भ्रष्टाचार की कालिख लेकर , खेला करते रोज ही होली  ,
                        भारत माँ की मैली चादर ,और भी मैली करते नेता ।

Monday, March 4, 2013

शायरी

बिखरे हुए अरमानों के एहसास में जलूं ।
                       या  वक्त  बदलने  के  विश्वास  में  चलूं ।

रुक के ठहर के बिन लूँ टूटे हुए सपने ,
                     या फिर से नये खाब की तलाश में चलूं ।


Sunday, March 3, 2013

यूँ ही नही कोई हालात से डरता होगा

यूँ  ही  नही कोई  हालात से डरता होगा ।
झूठ कहता है तो सच बात से डरता होगा ।

तन्हा छोड़ गया होगा जब कोई राहों में ,
 इसीलिए वो किसी साथ से डरता होगा ।

नींद जब लाख मनाने से न मानी होगी ,
तभी वो जागती हर रात से डरता होगा ।

नही देता है किसी को भी अपने दिल का पता ,
पुराने जख्म के आघात से डरता होगा ।

कभी फुर्सत में भी खुद से हंसके मिलता नही ,
दिल जलाते हुए जज्बात से डरता होगा ।
 
यूँ  ही  नही कोई  हालात से डरता होगा ।
झूठ कहता है तो सच बात से डरता होगा ।