Theme of this blog is love and emotions attached . Songs , Gajals , Shayri written on this blog are completely my personal vies and feelings which i put into words. You can find different kind of emotion related to love and passion arranged into words which will touch your heart.
Sunday, April 6, 2014
Saturday, April 5, 2014
Friday, April 4, 2014
राह प्यार कि
टेढ़े - मेढ़े रस्तों से जब राह प्यार कि मिले न तुमको ,
सीधे - सीधे आ जाना मैं प्रेम गली में रहती हूँ ।
दूर - दूर तक परछाई भी साथ नही जब देती हो ,
मुझको तुम महसूस करो मैं साथ तुम्हारे चलती हूँ ।
रात - रात जब नींद न आये सुबह लगे जब अलसाई ,
मूंद के आँखे मुझे बुलाना मैं खाबों में मिलती हूँ ।
झूठ और मक्कारी से जब थक जाओ तब सच कहना ,
कहीं तुम्हारे दिल में बनके कमीं तो नही खलती हूँ ।
सीधे - सीधे आ जाना मैं प्रेम गली में रहती हूँ ।
दूर - दूर तक परछाई भी साथ नही जब देती हो ,
मुझको तुम महसूस करो मैं साथ तुम्हारे चलती हूँ ।
रात - रात जब नींद न आये सुबह लगे जब अलसाई ,
मूंद के आँखे मुझे बुलाना मैं खाबों में मिलती हूँ ।
झूठ और मक्कारी से जब थक जाओ तब सच कहना ,
कहीं तुम्हारे दिल में बनके कमीं तो नही खलती हूँ ।
Thursday, April 3, 2014
Wednesday, April 2, 2014
पत्थर से टकराकर पत्थर बन जायेंगे लगता है
पत्थर से टकराकर पत्थर बन जायेंगे लगता है ।
करो कोशिशें मोम न फिर हम बन पायेंगे लगता है ।
चाँद-सितारे ताक-ताक के रात-रात भर जाग-जाग के ,
शायर बने - बने न पागल बन जायेंगे लगता है ।
इधर-उधर कि ताक-झाँक से धूल राह कि फांक-फांक के,
आशिक बने न आवारा तो बन जायेंगे लगता है ।
तेरे चक्कर लगा-लगा के तोहफे तुझको दिला-दिला के ,
बने न शायद पति भिखारी बन जायेंगे लगता है ।
करो कोशिशें मोम न फिर हम बन पायेंगे लगता है ।
चाँद-सितारे ताक-ताक के रात-रात भर जाग-जाग के ,
शायर बने - बने न पागल बन जायेंगे लगता है ।
इधर-उधर कि ताक-झाँक से धूल राह कि फांक-फांक के,
आशिक बने न आवारा तो बन जायेंगे लगता है ।
तेरे चक्कर लगा-लगा के तोहफे तुझको दिला-दिला के ,
बने न शायद पति भिखारी बन जायेंगे लगता है ।
Tuesday, April 1, 2014
अफसाना बन जाता
अच्छा है पन्ना पलट गया
और एक कहानी खत्म हुई ,
ना जाने कितने पन्नों का
ये एक फ़साना बन जाता ।
अच्छा है शमां जली नही
ये रात गुजर गई आँखों में ,
गर शमां जलाई जाती तो
लाखों परवाना बन जाता ।
पहचान यहीं तक अच्छी है
बस दुआ सलाम हो जाती है ,
होता तोहफों का लेन-देन
घर आना - जाना बन जाता ।
कुछ बात हमारे मन में थी
कुछ बात तुम्हारे मन में थी ,
अच्छा है राज ये खुला नही
वरना अफसाना बन जाता । ।
और एक कहानी खत्म हुई ,
ना जाने कितने पन्नों का
ये एक फ़साना बन जाता ।
अच्छा है शमां जली नही
ये रात गुजर गई आँखों में ,
गर शमां जलाई जाती तो
लाखों परवाना बन जाता ।
पहचान यहीं तक अच्छी है
बस दुआ सलाम हो जाती है ,
होता तोहफों का लेन-देन
घर आना - जाना बन जाता ।
कुछ बात हमारे मन में थी
कुछ बात तुम्हारे मन में थी ,
अच्छा है राज ये खुला नही
वरना अफसाना बन जाता । ।
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