Friday, April 4, 2014

my devi maa song

राह प्यार कि

टेढ़े - मेढ़े रस्तों से जब राह प्यार कि मिले न तुमको ,
सीधे - सीधे आ जाना मैं प्रेम गली में रहती हूँ ।

दूर - दूर तक परछाई भी साथ नही जब देती हो ,
मुझको तुम महसूस करो मैं साथ तुम्हारे चलती हूँ ।

रात - रात जब नींद न आये सुबह लगे जब अलसाई ,
मूंद के आँखे मुझे बुलाना मैं खाबों में मिलती हूँ ।

झूठ और मक्कारी से जब थक जाओ तब सच कहना ,
कहीं तुम्हारे दिल में बनके कमीं तो नही खलती हूँ ।

Thursday, April 3, 2014

बेवफाओं से शिकायत क्या करें

टूट कर हम रह गये जिसके लिए ,
हाल भी उसने नही पूछे मेरे ।

एक हम ही तो न थे उनके लिए ,
चाहने वाले हजारों हैं पड़े ।

देख के देखे न अब ये हाल है ,
बेवफाई में भी नखरे हैं बड़े ।

क्या गिला हो क्या कहे क्या ना कहे  ,
बेवफाओं से शिकायत क्या करें ।




Wednesday, April 2, 2014

पत्थर से टकराकर पत्थर बन जायेंगे लगता है

पत्थर से टकराकर पत्थर बन जायेंगे लगता है ।
करो कोशिशें मोम न फिर हम बन पायेंगे लगता है ।

चाँद-सितारे ताक-ताक के रात-रात भर जाग-जाग के ,
शायर बने - बने न पागल बन जायेंगे लगता है ।

इधर-उधर कि ताक-झाँक से धूल राह कि फांक-फांक के,
आशिक बने न आवारा तो बन जायेंगे लगता है ।

तेरे चक्कर लगा-लगा के तोहफे तुझको दिला-दिला के ,
बने न शायद पति भिखारी बन जायेंगे लगता है ।



Tuesday, April 1, 2014

अफसाना बन जाता

अच्छा है पन्ना पलट गया
और एक कहानी खत्म हुई ,
ना जाने कितने पन्नों का
ये एक फ़साना बन जाता ।

अच्छा है शमां जली नही
ये रात गुजर गई आँखों में  ,
गर शमां जलाई जाती तो
लाखों परवाना बन जाता ।

पहचान यहीं तक अच्छी है
बस दुआ सलाम हो जाती है ,
होता तोहफों का लेन-देन
घर आना - जाना बन जाता ।

कुछ बात हमारे मन में थी
कुछ बात तुम्हारे मन में थी ,
अच्छा है राज ये खुला नही
वरना अफसाना बन जाता । ।