Google+ Followers

Wednesday, September 13, 2017

जी न लगया

ऐसो बीमारी जी को लगया सखी,
लाख़ लगाऊं जी न लगया कहीं ,

कैसे छुपाऊं अब ये हाले-जिया ,
किसको बताऊं मैं जी लगया न जी ।

By
प्रीति सुमन

No comments:

Post a Comment