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Sunday, November 9, 2014

अजन्मा भूत

एक पीपल पर एक भूत रहता था । वो अक्सर आस - पास खेलने वाले बच्चों को पकड़ लेता था ।
पूरा मुहल्ला परेशान । ओझा बुलाये गए और ओझा द्वारा भूत बुलाया गया । पर ओझा के
लाख कोशिशों के बाद भी भूत न भागा न कुछ बोला ।

आखिर में हार कर ओझा ने उसी पीपल के
दूसरे भूत को बुलाया ।पता चला ये किसी अजन्मे बच्चे का भूत है जो किसी भूत से भी बात नही करता ।

अब ओझा ने सोंचा 'बच्चा जरूर इसी मुहल्ले का है ,और अपनी माँ को ढूंढ रहा है । ओझा ने पूरे मुहल्ले
की औरतों को जमा किया और भूत को एक बच्चे में बुलाया । अब भूत को अपनी माँ को पहचानने को कहा गया पर उसने पहचानने से इनकार  दिया ।ओझा फिर नाकाम रहा ।

बड़ी समस्या हो गई । अब ओझा ने मुहल्ले की सभी औरतों से बात की पर सभी भूत को अपना बच्चा मानने से इनकार कर दिया ।

एकाएक बच्चा बोल पड़ा ; मैं जानती हूँ इन्हीं ओरतों में मेरी माँ है । वो मुझे पहचानती हैं पर मुकर रही हैं । अब मैं गाँव छोड़कर जा रही हूँ । बस मैं अपनी माँ से ये कहने आई थी माँ अगर मैं होती ,
भैया को तुम्हे घर से निकालने नही देती ,भाभी को तुम्हे गालियाँ देने नही देती  । माँ मैं तुम्हे तन्हा होने नही देती । काश ! मैं आज जिन्दा होती।


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