Google+ Followers

Thursday, June 12, 2014

उलझन

मैं  भी  रोया  तू भी रोई , पर  रोने  से क्या होता है ,
मैं  तेरा  हूँ  तू  मेरी  है  , जुदा  होने से  क्या होता हैं | 

है कौन भला इस दुनिया में , जिसको न कोई गम होता है,
जाने से दूर सनम से भी , ये प्यार कहाँ कम होता है | 

जकड़े जाते हैं तन लेकिन , मन बांध कहाँ कोई पाता है,
जब आँख देखती है सपने , मन का पंछी उड़ जाता है |

दुनिया को नही मंजूर है ये , कोई प्यार भरा अफसाना हो,
चाहे जितने भी हो दुश्मन , पर ना कोई दीवाना हो |

मिलती हैं सजाएं उल्फत में , पत्थर बरसाए जाते हैं,
ऐ यारा कर्ज मुहब्त में , ऐसे ही चुकाए  जाते है |

फिर उठेंगी ऊँची दिवारे , लाखों फतवे जारी होंगे ,
जिसे देख कयामत रोएगी , वो सितम ऐसे भारी होंगे | 

ममता देने वाली आँचल , बिल्कुल छोटी पर जायगी ,
खुशियाँ देने वाली आँखे , गम आँखों में भर जायगी | 

टूटेंगे जब दो दिल तबही, इस दुनिया को राहत होगी ,
महफिल में नफरतवालों के , फिर से रुसवा चाहत होगी | 

इस प्रेम डगर में दीवानी  ,  इक मंजिल है दो राहें है ,
उस ओर जमाने की रौनक , इस ओर दर्द और आहें है |  

काँटों से भरे इन राहों पे , चल पाना बड़ा मुश्किल होगा ,
दम निकलेगा अरमानों का , छलनी-छलनी ये दिल होगा | 

 ऐसा ना हो आगे बढके , फिर से पीछे मुडजाना  हो ,
चलने से पहले सोंच जरा , ना की पीछे पछताना हो |

अच्छा होगा तू सुलझाले ,अपनी उमीदों की उलझन , 
ऐसा ना हो तेरे कारण  , जख्मी हो मेरा दिवानापन | 

ये सौदा दिलों का होता है , ये खेल बड़ा ही मुश्किल है ,
तेरे पास जमाने की दौलत , मेरे पास तो बस मेरा दिल है | 

हर गम दुनिया के सह लेगा , ये गम ना दिल सह पायेगा ,
मैं रोक न पाउंगा दिल को , दर्दे गम में बह  जायगा | 

इस दम ही मुझको भूल के तू , कोई ढूंढ़ ले नये बहाने को ,
या तो दे वफाओं की रौनक , या मार दे फिर दीवाने को | 

क्या खोना है क्या पाना है , जो करना है इस दम कर ले ,
अपनाले या फिर ठुकरादे , अपनी उलझन  को कम कर ले | 

No comments:

Post a Comment