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Monday, May 19, 2014

हैप्पी नाईट

हवा ठंढी चले और पेड़ के पत्ते बिखर जाये ।
चलो अब रात गहरी हो गई सब अपने घर जाएँ ।


खुदा वो नींद दे हमको की सब कुछ भूल जाए हम ,
बस तकिये पे रखें सर और सपनों में उतर जाएँ ।





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