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Tuesday, May 27, 2014

उपासना

बहुत मंदिर में पूजा की और मस्जिद से भी हो आये ।
 न फिर भी ली खबर उसने न ये पूछा की क्यों आये ।

लगाके आस पहरों बंद करके आँख बैठे थे ,
न वादा था न आना था ना मिलने को वो आये ।

किसी ने क्या कहा उससे की उसकी बंदगी कैसे ,
बुलाये बिन सुना है वो किसी से मिलने को आये ।

गुनाहों से भरा था दिल न थे अरदास के काबिल ,
की बस दिल भर गया था गम से उसके आगे रो आये ।

मेरी इस बात से गमगीन हो भगवान जी बोले ,
रख दे पास मेरे गम बहुत दिन गम को ढ़ो आये ।

बड़े दिन बाद तुमने दिल में मुझको झांककर देखा ,
मैं कबसे राह तकता था इतने दिन बाद क्यों आये ।

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