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Thursday, May 29, 2014

जिंदगी लग जा गले

जिंदगी लग जा गले यूँ ज्यों बिछड़े यार मिले  ।
ऐ वक़्त लौट आ की फिर मुझे बहार मिले  ।

रौनकें बाग़ में आओ की फिर खिलेंगे गुल ,
भँवरे गुनगुनाओं कलियों को निखार मिलें ।

ऐ लू ठहर जा जरा चिलचिलाती धूप रुको ,
मेह बरसो की जलती धरती को श्रृंगार मिले ।

ऐ याद आज कहीं दूर चला जा मुझसे ,
ये न हो आये बहारें और हम बिमार मिलें ।

तितलियां मांगो दुआएं की रुत बदल जाये ,
हमें भी आये सुकूं तुमको भी करार मिलें ।

आज हम उनसे वो हमसे यूँ मिलने आये ,
ऐसे जैसे की दो दीवाने बेकरार मिले ।











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