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Saturday, May 17, 2014

मेरे हमदम मेरे दोस्त

मैं अपने चेहरे पे चेहरा लगाकर जी नही सकता ।
मेरे हमदम मैं तुमसे गम छुपाकर जी नही सकता ।

ऐ मेरे दोस्त हो जब वक़्त मेरे गम भी सुन लेना ,
मैं इस किस्से को अब दिल में दबाकर जी नही सकता ।

गले लगकर मेरे दो पल को दो आँसू बहा लेना  ,
मैं दुनियाँ भर के गम दिल से लगाकर जी नही सकता ।

कितने लोग मिलते हैं बिछड़ जाते हैं राहों में ,
मगर ये सच है मैं तुमसे बिछड़कर जी नही सकता ।

बहुत मुश्किल से जोड़े हैं मैंने इस दिल के टुकड़ों को ,
सम्भालो दिल मैं अब फिर से बिखरकर जी नही सकता ।

मुझे रहने दो अपने दिल के इक छोटे से कोने में ,
मुझे लगता है मैं बाहर निकलकर जी नही सकता

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