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Monday, April 14, 2014

मैं दिल के सफर में हूँ

मीलों अभी चलना है मैं दिल के सफर में हूँ ।
वो मेरी नजर में है मैं उसकी नजर में हूँ ।

डर इस बात का नही है की तूफां है जोर का ,
खौफ इस बात से होता है मैं सीसे के घर में हूँ ।

किसको है पता कल मैं कहाँ कल तू कहाँ हो ,
मिलने को कभी आ अभी तेरे शहर में हूँ ।

अच्छी कहाँ लगती है बुजुर्गों की नसीहत ,
सब बेअसर लगता है मैं तेरे असर में हूँ ।

इक तुम हो की मगरूर बने बैठे हो हमसे ,
इक मैं की रात -दिन सदा तेरी फ़िकर में हूँ ।





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