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Tuesday, April 1, 2014

अफसाना बन जाता

अच्छा है पन्ना पलट गया
और एक कहानी खत्म हुई ,
ना जाने कितने पन्नों का
ये एक फ़साना बन जाता ।

अच्छा है शमां जली नही
ये रात गुजर गई आँखों में  ,
गर शमां जलाई जाती तो
लाखों परवाना बन जाता ।

पहचान यहीं तक अच्छी है
बस दुआ सलाम हो जाती है ,
होता तोहफों का लेन-देन
घर आना - जाना बन जाता ।

कुछ बात हमारे मन में थी
कुछ बात तुम्हारे मन में थी ,
अच्छा है राज ये खुला नही
वरना अफसाना बन जाता । ।

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