Google+ Followers

Saturday, June 22, 2013

हम हार गये दिल

जाने मेरी वफ़ा का कब तुमपे असर हो । 
आवाज देके थक गये ना जाने किधर हो । 

ऐसा न हो  तेरे प्यार में हो जाए फना हम ,
बेवजह इल्जामें - कत्ल आपके सर हो । 

नफरत को भी गर चाहें मुहब्बत में बदल दें ,
दुश्मन को माफ़ करने का मिजाज़ अगर हो । 

मलाल जिन्दगी से रखते हैं दीवाने ,
जो इश्क के मारे उन्हें क्यूँ मौत का डर हो । 

ऐसी अदा  देखि न थी पहले कहीं तौबा ,
न तीर न खंजर चले पर चाक जिगर हो । 

तुम जित गये दिल मेरा हम हार गये दिल  ,
जो भी था मेरा आज से सब तुझको नजर हो । 

1 comment: