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Friday, May 31, 2013

मुझे मुहब्बत है

जिसको देखो यहाँ वो ही सलाह देता है ,

यही अच्छा है की यारों हम अक्लमंद नही ।

थोड़े मजबूर हैं हालात के हांथों से अभी ,

जिन्दगी जंग है इससे बड़ी कोई जंग नही  ।

अभी तो बंद है मुट्ठी किसे मालूम क्या है ,

अभी तो हमने दिखाए कई और रंग नही ।

इक अकेले भी जिधर चल दूँ जीत लूँ दुनियां   ,

क्या फर्क पड़ता है जो तू भी मेरे संग नही ।

गम इतना है तू वादों से मुकर जाता है ,

ये बेवफाई है ये इश्क का कोई ढंग नही ।

मैं जिउंगी भला कैसे मुझे मुहब्बत है  ,

दिल को ये दर्द है पर दर्द से दिल तंग नही ।

तू मुकर जायेगा कब तक निभाएगा यारी ,

मैं जानती थी इस हालात से मैं दंग  नही । 

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