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Friday, April 26, 2013

तोहफे यार के

घाटे में रह गये हम हर बार की तरह ,
                 बस प्यार ही देते रहें चाहत में प्यार के ।

ये जज्बात हैं मेरे ,न हैं गजल या कहानी ,
           ये वो दर्द है , गुजरे हैं जिसमे दिन गुजार के ।

रुसवाई है तन्हाई है , जख्मों का जहर है ,
          ये रंजिश नही किसी की , ये तोहफे हैं यार के । 

2 comments:

  1. ये जज्बात हैं मेरे ,न हैं गजल या कहानी ,
    ये वो दर्द है , गुजरे हैं जिसमे दिन गुजार के ।------
    जीवन का सच है दर्द तो घूंट घूंट पीना ही पड़ता है
    सुंदर अनुभूति
    बधाई
    आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों

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