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Thursday, April 25, 2013

शायरी

फिर तेरा चर्चा हुआ , आँखें हमारी नम हुई ।
                       धड़कने फिर बढ़ गई , साँस फिर बेदम हुई  ।

चांदनी की रात थी ,,तारों का पहरा भी था ,
                 इसलिए ही शायद गम की आतिशबाजी कम हुई ।

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