Google+ Followers

Saturday, April 13, 2013

खुदा कुछ ऐसा कर

खुदा कुछ ऐसा कर की  ,  वक्ती मंसूबा बदल जाए ,
मैं खोटा हूँ, मगर तू चाहे तो , खोटा भी चल जाये ।

सदा ठोकर खिलाकर ही   , हमें क्यूँ सीख देते हो ,
गिरा के ओरों को दे सीख , हम देखें सम्भल जायें ।  

माना बेवफाई में   ,  जलन होती जियादा है  , 
पर मेरा दिल जला ऐसे , दिल के गम भी जल जाये । 

बड़ी नादान है नियत , खिलाफत तुझसे करती है ,
सलीका दे इबादत का  , खुराफातें निकल जाये  । 

कबसे ताक  में बैठा है  ,  तेरे दीदार  को ये  दिल  ,
जमाना छोड़ दूँ  , इकबार बस तू मुझको मिल जाए ।   



No comments:

Post a Comment