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Monday, March 4, 2013

शायरी

बिखरे हुए अरमानों के एहसास में जलूं ।
                       या  वक्त  बदलने  के  विश्वास  में  चलूं ।

रुक के ठहर के बिन लूँ टूटे हुए सपने ,
                     या फिर से नये खाब की तलाश में चलूं ।


2 comments:

  1. बहुत खूब आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    तुम मुझ पर ऐतबार करो ।

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  2. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी .बेह्तरीन अभिव्यक्ति .
    आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.
    http://madan-saxena.blogspot.in/
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